श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2026’ के अंतर्गत दो दिवसीय आंतरिक हैकाथॉन का शानदार शुभारंभ हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, तकनीकी क्षमता और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की सोच को बढ़ावा देना है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, नवाचार प्रकोष्ठ और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के युवा छात्रों की कई टीमों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। कंप्यूटर साइंस एन्ड आईटी डिपार्टमेंट की चेयरपर्सन प्रोफेसर उषा बत्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह आंतरिक प्रतियोगिता विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2026 के लिए तैयार करने का एक प्रमुख मंच प्रदान कर रही है, जहाँ वे वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए अपने नवोन्मेषी और डिजिटल समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस इवेंट में लगभग 450 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। स्किल फैकल्टी ऑफ़ इंजिनयरिंग टेक्नॉलजी के डीन प्रोफेसर आशीष श्रीवास्तव और डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर कुलवंत सिंह ने भी विद्यार्थियों को हैकथॉन के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करने और उनकी परियोजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए उद्योग जगत व प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की उपस्थिति रही। निर्णायक मंडल में सौरभ वड्डेरा, प्रमुख – क्लाउड एवं अवसंरचना सेवाएँ, भूपेश मित्तल संस्थापक – माई इन्वेंटेड, डॉ. प्रतीक थापर संस्थापक – क्यूबिट्स टेंसर प्राइवेट लिमिटेड, नकुल प्रितम, वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियर, माइक्रोसॉफ्ट, अमित डागर सह-संस्थापक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, विलियर प्राइवेट लिमिटेड और महक अरोड़ा, वरिष्ठ डेटा परामर्शदाता, ज़ेबिया शामिल रहे। प्रतियोगिता के प्रथम दिन विभिन्न टीमों ने अपने विचार, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर मॉडल निर्णायकों के समक्ष प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने छात्रों की सोच की सराहना करते हुए उन्हें तकनीक को और बेहतर बनाने के मार्गदर्शन दिए। विश्वविद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से छात्रों की व्यावहारिक क्षमता मजबूत होती है। प्रतियोगिता का समापन 15 सितंबर को होगा, जिसके बाद श्रेष्ठ टीमों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए नामांकित किया जाएगा। इस अवसर पर डीन प्रोफेसर सुचित्रा वशिष्ठ, डीन प्रोफेसर राम विरंजन, परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजेश कुमार, डॉ. मोनिका जांगड़ा, डॉ. पारुल बेरवाल, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. शालू और संशबीर डागर सहित काफी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।